संदेश

छंद किसे कहते है | Chhand kise kahte hai

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण छंद काव्य के व्याकरण को छन्द कहा जाता है सर्वप्रथम प्रयोग ऋग्वेद में मिलता है छन्द के प्रथम प्रणेता पिंगल ऋषि को माना जाता है पिंगल ऋषि ने अपनी रचना छन्द सूत्रम् उल्लेख किया छंद के अंग छंद के सात अंग होते है चरण /पद वर्ण/मात्रा तुक लघु / गुरु यति (विराम) गति (लय) गण (संख्या क्रम) उदाहरण जाल परे जल जात वही , तजि मीरन को मोह   रहिमन मछरी नीर को , तऊन छड़त दोह छंद के सूत्र यमाताराजभानसलगा य मा ता रा ज भा न स ल गा Ι    ζ    ζ   ζ   Ι    ζ    Ι    Ι   Ι    ζ छंद के भेद छंद के चार भेद होते है मात्रिक छन्द (मात्रा) वर्णिक छन्द (वर्ण) मुक्तक छन्द(बिना वर्ण, बिना मात्रा) मात्रिक छंद (Matrik Chhand) इसमें मात्राओ की गणना की जाती है मात्रिक छंद के भेद मात्रिक छन्द के तीन भेद होते है सम मात्रिक छन्द अर्द्ध सम मात्रिक छन्द विषम मात्रिक छन्द सम मात्रिक छन्द चौपाई (16) रोला (24) गीतिका (26) हरिगीतिका (28) रूपमाला (24) वीर (आल्हा )छन्द(31) चौपाई (16) यह एक ...

अयादि संधि: परिभाषा, नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण तथ्य

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > संधि > स्वर संधि अयादि संधि: परिभाषा, नियम और उदाहरण - हिंदी व्याकरण का संपूर्ण ज्ञान अयादि संधि हिंदी व्याकरण में व्यंजन संधि का विशेष प्रकार है जो प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, राज्य PSCs, शिक्षक भर्ती) में अक्सर पूछा जाता है। जब शब्दों के मेल से आ, या वर्ण परिवर्तन होता है, तो उसे अयादि संधि कहते हैं। आइए, इसके नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझें। अयादि संधि की परिभाषा इस संधि में व्यंजनों या स्वरों के मेल से नए शब्दों का निर्माण होता है। यह संधि "अयादि" शब्द से व्युत्पन्न है, जहाँ "आय" का अर्थ है 'परिवर्तन' और "आदि" का अर्थ है 'आदि अन्य'। इसके अंतर्गत विशेष प्रकार के वर्ण परिवर्तन होते हैं। अयादि संधि के प्रमुख नियम और उदाहरण  1.      इ/ई + अ/आ = ए जब इ या ई के बाद अ या आ आए, तो ए बनता है। उदाहरण: नदी + अमृत = नद्यमृत श्रद्धा + आलय = श्रद्धालय 2.     उ/ऊ + अ/आ = ओ जब उ या ऊ के बाद अ या आ आए, तो ओ बनता है। उदाहरण: साधु + आचरण = साध्वाचरण गुरु + आज्ञा = गुर्वाज्ञा 3.      ऋ + अ...

यण संधि: परिभाषा, नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण तथ्य

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > संधि > स्वर संधि यण संधि: परिभाषा, नियम और उदाहरण - हिंदी व्याकरण का संपूर्ण ज्ञान यण संधि हिंदी व्याकरण में स्वर संधि का चौथा प्रकार है जो प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSSSC, UPP, UPTET,  REET,  राज्य PSCs, शिक्षक भर्ती) में अक्सर पूछा जाता है। जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो इनका मेल य, व, र् में बदल जाता है। आइए, इसके नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझें। यण संधि की परिभाषा यण संधि में जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर (अ, आ, इ, उ, ऋ आदि) आता है, तो वे क्रमशः य, व, र् में परिवर्तित हो जाते हैं। यह परिवर्तन संस्कृत और हिंदी दोनों में समान रूप से लागू होता है। "यण" शब्द य, व, र् तीनों वर्णों को सम्मिलित करता है। यण संधि के मुख्य नियम और उदाहरण 1.    इ/ई  +  भिन्न स्वर = य जब इ या ई के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो इ/ई का य में परिवर्तन होता है। उदाहरण: इति + आदि = इत्यादि नदी + अर्पण = नद्यर्पण प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष 2.    उ/ऊ + भिन्न स्वर = व जब उ या ऊ के बाद कोई भिन्न स्वर आ...

वृद्धि संधि: परिभाषा, नियम, उदाहरण और महत्वपूर्ण तथ्य

  वृद्धि संधि: परिभाषा, नियम और उदाहरण - हिंदी व्याकरण का संपूर्ण ज्ञान वृद्धि संधि हिंदी व्याकरण में स्वर संधि का महत्वपूर्ण प्रकार है जो प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, राज्य PSCs, शिक्षक भर्ती) में अक्सर पूछा जाता है। जब अ/आ के साथ ए/ऐ या ओ/औ का मेल होता है और परिणामस्वरूप ऐ या औ बनता है, तो उसे वृद्धि संधि कहते हैं। आइए, इसके नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझें।   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > संधि > स्वर संधि वृद्धि संधि की परिभाषा वृद्धि संधि में जब अ या आ के बाद ए, ऐ, ओ या औ आता है, तो उनके मेल से क्रमशः ऐ या औ बन जाता है। यह संस्कृत व्याकरण पर आधारित है और हिंदी में भी प्रचलित है। "वृद्धि" शब्द का अर्थ है "वृद्धि होना" - यहाँ स्वरों के मेल से नया वर्ण बनता है। वृद्धि संधि के मुख्य नियम और उदाहरण अ/आ + ए/ऐ = ऐ जब पहला शब्द अ या आ से समाप्त हो और दूसरा शब्द ए या ऐ से शुरू हो। उदाहरण : महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य देव + ऐश = देवैश अ/आ + ओ/औ = औ जब पहला शब्द अ या आ से समाप्त हो और दूसरा शब्द ओ या औ से शुरू हो। उदाहरण: महा + औषध = महौषध चतुर +...