पल्लव वंश: इतिहास, शासक, स्थापत्य कला | Pallava Dynasty

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पल्लव वंश: दक्षिण भारत के वास्तुकला के पथ प्रदर्शक

  • पल्लव वंश प्राचीन दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली और प्रतिष्ठित राजवंश था, जिसने लगभग 600 वर्षों तक शासन किया।
  • इनका शासन क्षेत्र मुख्य रूप से आधुनिक तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में था और उनकी राजधानी कांचीपुरम (कांजीवरम) थी।
  • पल्लवों ने न केवल राजनीतिक स्थिरता प्रदान की, बल्कि कला, साहित्य और वास्तुकला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
  • उनकी स्थापत्य कला, विशेष रूप से “मामल्लपुरम” (महाबलीपुरम) में स्थित रथ मंदिर और शिलाचित्र, भारतीय कला के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय हैं।
  • यह आर्टिकल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पल्लव वंश का एक संपूर्ण और गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है।

पल्लव वंश का उदय और प्रमुख शासक

  • पल्लव वंश का उदय तीसरी शताब्दी ईस्वी के आसपास माना जाता है, लेकिन उनका वास्तविक प्रभुत्व छठी शताब्दी से नौवीं शताब्दी तक रहा।
  • उन्होंने चालुक्यों, पांड्यों और चोलों जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ लगातार संघर्ष किया।
  1. शिवस्कंदवर्मन
  2. महेंद्रवर्मन प्रथम
  3. नरसिंहवर्मन प्रथम
  4. महेंद्रवर्मन द्वितीय और परमेश्वरवर्मन
  5. नरसिंहवर्मन द्वितीय
  6. नंदिवर्मन द्वितीय और अपराजितवर्मन
1. शिवस्कंदवर्मन:
  • ये प्रारंभिक पल्लव शासक थे, जिन्होंने ‘अश्वमेध यज्ञ’ किया था।
2. महेंद्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.):
  • इन्हें पल्लव वंश का पहला महान शासक माना जाता है।
  • वे एक विद्वान, संगीतज्ञ और कलाप्रेमी थे।
  • उन्होंने ‘मत्तविलास प्रहसन’ नामक नाटक की रचना की।
  • मामल्लपुरम में गुफा मंदिरों के निर्माण का श्रेय इन्हीं को जाता है।
3. नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.):
  • महेंद्रवर्मन के पुत्र नरसिंहवर्मन, जिन्हें ‘मामल्ल’ भी कहा जाता था, पल्लव वंश के सबसे शक्तिशाली शासक बने।
  • उन्होंने चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर ‘वातापीकोंड’ की उपाधि धारण की।
  • उन्होंने ही मामल्लपुरम के एकाश्म रथ मंदिरों और ‘तटेश्वर मंदिर’ के निर्माण को प्रोत्साहन दिया।
4. महेंद्रवर्मन द्वितीय और परमेश्वरवर्मन:
  • इन शासकों ने चालुक्यों के निरंतर आक्रमणों का सामना किया।
5. नरसिंहवर्मन द्वितीय (700-728 ई.):
  • इन्हें ‘राजसिंह’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • इनके शासनकाल में पल्लव वास्तुकला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची।
  • कांचीपुरम में स्थित प्रसिद्ध ‘कैलाशनाथ मंदिर’ का निर्माण इन्हीं के शासनकाल में हुआ था।
6. नंदिवर्मन द्वितीय और अपराजितवर्मन:
  • इनके बाद पल्लवों का पतन शुरू हो गया और अंततः 9वीं शताब्दी में चोल शासक आदित्य प्रथम ने पल्लव वंश का अंत कर दिया।

पल्लवों का सांस्कृतिक एवं कलात्मक योगदान

  • पल्लव वंश की सबसे बड़ी देन भारतीय स्थापत्य कला को है।
  • उन्होंने द्रविड़ शैली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) के स्मारक:

  • यह स्थान पल्लव कला का जीवंत उदाहरण है।

पंच रथ:

  • ये पाँच एकाश्म (मोनोलिथिक) रथ मंदिर हैं, जिन्हें एक ही विशाल चट्टान को तराशकर बनाया गया है।
  • ये महाभारत के पाँच पांडवों के नाम पर हैं।

तटेश्वर मंदिर:

  • यह भारत के प्राचीनतम संरचनात्मक पत्थर के मंदिरों में से एक है।

अर्जुन की तपस्या / गंगावतरण:

  • यह एक विशाल शिलाचित्र (Open Air Relief) है, जो गंगा नदी के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की कथा को दर्शाता है।
  • कांचीपुरम के मंदिर: कैलाशनाथ मंदिर और वैकुंठ पेरुमल मंदिर जैसे भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ।

साहित्य:

  • संस्कृत और तमिल साहित्य को पल्लव संरक्षण प्राप्त था।
  • दंडिन जैसे विद्वान उनके दरबार की शोभा थे।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Previous Year Questions Based)

  • यहाँ पल्लव वंश से संबंधित कुछ ऐसे प्रश्न दिए गए हैं जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, State PSCs, SSC) में पूछे जा चुके हैं या पूछे जा सकते हैं।

1. प्रश्न: ‘तटेश्वर मंदिर’ का निर्माण किस पल्लव शासक ने करवाया था?

उत्तर:

  • तटेश्वर मंदिर का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम के शासनकाल में करवाया गया था।

2. प्रश्न: वह पल्लव शासक कौन था जिसने चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और ‘वातापीकोंड’ की उपाधि धारण की?

उत्तर:

  • नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर ‘वातापीकोंड’ (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की।

3. प्रश्न: पल्लव वंश की राजधानी कहाँ थी?

उत्तर:

  • पल्लव वंश की राजधानी कांचीपुरम (वर्तमान कांजीवरम, तमिलनाडु) थी।

4. प्रश्न: मामल्लपुरम में स्थित ‘अर्जुन की तपस्या’ या ‘गंगावतरण’ क्या है?

उत्तर:

  • यह एक विशाल शिलाचित्र (Open Air Rock Relief) है जो भागीरथ की तपस्या और गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा को चित्रित करता है।

5. प्रश्न: कांचीपुरम में स्थित कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण किस शासक ने करवाया?

उत्तर:

  • कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) ने करवाया था।

6. प्रश्न: पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम द्वारा रचित संस्कृत नाटक का क्या नाम है?

उत्तर:

  • महेंद्रवर्मन प्रथम द्वारा रचित संस्कृत नाटक का नाम ‘मत्तविलास प्रहसन’ है।
निष्कर्ष
  • पल्लव वंश ने दक्षिण भारत के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।
  • उनके शासनकाल ने न केवल राजनीतिक संघर्षों को देखा बल्कि कला और संस्कृति का अद्वितीय विकास भी हुआ।
  • मामल्लपुरम आज भी दुनिया भर के पर्यटकों और इतिहासकारों को अपनी ओर आकर्षित करता है और यह पल्लवों की स्थापत्य कुशलता का एक जीवंत प्रमाण है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से, उनके प्रमुख शासक, स्थापत्य के नमूने और ऐतिहासिक युद्धों की जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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