संस्कृत में उच्चारण स्थान | sanskrit-me-uchcharan-sthan

संस्कृत में उच्चारण स्थान

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संस्कृत में सात उच्चारण स्थान होते है।

  1. कण्ठ
  2. तालु
  3. मूर्धा
  4. दन्त
  5. ओष्ठ
  6. नासिका
  7. जिह्वामूलम्
  8. कण्ठतालु
  9. कण्ठोष्ठ (कण्ठ + ओष्ठ)
  10. दन्तोष्ठ (दन्त + ओष्ठ)

पाणिनीय शिक्षा में उच्चारण स्थान

  • पाणिनीय शिक्षा में आठ उच्चारण स्थान होते है।
  1. कण्ठ
  2. तालु
  3. मूर्धा
  4. दन्ताः
  5. ओष्ठौ
  6. नासिका
  7. जिह्वामूलम्
  8. उरस् (ह्रदय)

1. कण्ठ

सुत्र अ कु ह विसर्जनीयानां कण्ठः

अ/आ क् ख् ग् घ् ङ् ह् और विसर्ग का उच्चारण स्थान कण्ठ है


2. तालु

सुत्र इ चु यशानां तालु 

इ/ई च् छ् ज् झ् ञ् य् श् का उच्चारण स्थान तालु है


3. मूर्धाः

सुत्र ऋ टु रषाणां मूर्धा

ऋ/ऋ ट् ठ् ड् ढ् ण् र् ष् का उच्चारण स्थान मूर्धा है


4. दन्ता

सुत्र लृ तु लसानां दन्ता

लृ त् थ् द् ध् न् ल् स् का उच्चारण स्थान दन्त है


5. ओष्ठ

सुत्र उपूपध्मानीयानामां औष्ठौ

उ/ऊ प् फ् ब् भ् म् और उपध्मानीयानाम् का उच्चारण स्थान ओष्ठ है


6. नासिक्य

सुत्र ञ म ङ ण नानां नासिका च

ञ् म् ङ् ण् न  का उच्चारण स्थान नासिक्य है

7 जिह्वामूलम्


8. कण्ठतालु

सुत्र एदैतोः कण्ठतालु

ए ऐ

अ/आ (कण्ठ) + इ/ई (तालु) =ए (कण्ठतालु)

अ/आ (कण्ठ) + ए (तालु) =ऐ (कण्ठतालु)

उदाहरण

उपेन्द्रः (उप + इन्द्रः)

तथैव (तथा + एव)


9. कण्ठ ओष्ठ

सुत्र ओदौतोः कण्ठोष्ठम्

ओ औ

अ/आ (कण्ठ) + उ/ऊ (ओष्ठ) = (कण्ठोष्ठ)

अ/आ (कण्ठ) + (कण्ठोष्ठ) = (कण्ठोष्ठ)

कण्ठ और ओष्ठ के इस मिलाप के कारण इनका उच्चारण स्थान ‘कण्ठोष्ठम्’ कहलाता है।

उदाहरण:

महोत्सवः (महा + उत्सवः)

वनौषधिः (वन + औषधिः)


10. दन्त ओष्ठ

सुत्र वकारस्य दन्तोष्ठम्

व्


दो उच्चारण स्थान वाले वर्ण

ए  कण्ठ + तालु

ऐ ⇒ कण्ठ + तालु

ओ ⇒ कण्ठ + औष्ठ

औ ⇒ कण्ठ + औष्ठ


व् ⇒ दन्त + औष्ठ


ङ ⇒ कण्ठ + नासिका

ञ् ⇒ तालु + नासिका

ण् ⇒ मूर्धा + नासिका

न् ⇒ दन्त + नासिका

म् ⇒ औष्ठ + नासिका


यत्न

  • वर्ण के उच्चारण से पहले या बाद में किये जाने वाले आंतरिक प्रयास को यत्न कहते है

प्रयत्न के प्रकार

  • प्रयत्न दो प्रकार के होते है
  1. आभ्यन्तर प्रयत्न
  2. बाह्य प्रयत्न

आभ्यन्तर प्रयत्न

  • वर्ण के उच्चारण से पहले किये जाने वाले आंतरिक प्रयास को आभ्यन्तर यत्न या प्रयत्न कहते है

आभ्यन्तर प्रयत्न की संख्या

आभ्यन्तर प्रयत्न की संख्या पाँच होती है

  1. स्पृष्ट (स्पर्श वर्ण)
  2. ईषत् स्पृष्ट (अन्तःस्थ वर्ण)
  3. ईषत् विवृत (ऊष्म वर्ण)
  4. विवृत (स्वर)
  5. संवृत

1. स्पृष्ट (स्पर्श वर्ण)

इसमे कुल 25 वर्ण होते है

स्पृष्ट (स्पर्श वर्ण)

क वर्गक्ख्ग्घ्
च वर्गच्छ्ज्झ्ञ्
ट वर्गट्ठ्ड्ढ्ण्
त वर्गत्थ्द्ध्न्
प वर्गप्फ्ब्भ्म्

2. ईषत् स्पृष्ट (अन्तःस्थ वर्ण)

य् व् र् ल्

3. ईषत् विवृत (ऊष्म वर्ण)

श् ष् स् ह्

शल् प्रत्याहार

4. विवृत (स्वर)

स्वर वर्ण

अच् प्रत्याहार

5. संवृत


बाह्य प्रयत्न

  • वर्ण के उच्चारण के बाद किये जाने वाले आंतरिक प्रयास को बाह्य प्रयत्न कहते है

बाह्य प्रयत्न के प्रकार

बाह्य प्रयत्न की कुल संख्या 11 (एकादश) होती है।

  1. विवार
  2. श्वास
  3. अघोष
  4. संवार
  5. नाद
  6. घोष
  7. अल्पप्राण
  8. महाप्राण
  9. उदात्त
  10. अनुदात्त
  11. स्वरित

1. विवार, श्वास और अघोष

इसके अंतर्गत ‘खर’ प्रत्याहार के वर्ण आते हैं।

सूत्र: खरो विवाराः श्वासा अघोषाश्च

वर्ण: प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ) तथा श, ष, स

2. संवार, नाद और घोष

इसके अंतर्गत ‘हश्’ प्रत्याहार के वर्ण आते हैं।

सूत्र: हशः संवारा नादा घोषाश्च

वर्ण: प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ वर्ण (ग, घ, ङ, ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म) तथा य, र, ल, व, ह

3. अल्पप्राण (कम वायु निकलना)

सूत्र: वर्गणां प्रथमतृतीयपञ्चमा यणश्चाल्पप्राणाः

वर्ण: प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ (1, 3, 5) वर्ण तथा ‘यण’ प्रत्याहार (य, र, l, व)

4. महाप्राण (अधिक वायु निकलना)

सूत्र: वर्गणां द्वितीयचतुर्थौ शलश्च महाप्राणाः

वर्ण: प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा (2, 4) वर्ण तथा ‘शल’ प्रत्याहार (श, ष, स, ह)

5. उदात्त, अनुदात्त और स्वरित

यह तीनों प्रयत्न केवल स्वरों (अच्) के होते हैं। व्यंजनों के नहीं।

  1. उदात्त: उच्च स्वर (बिना किसी चिह्न के)

  2. अनुदात्त: नीचा स्वर (अक्षर के नीचे पड़ी रेखा _)

  3. स्वरित: समाहार या मध्यम स्वर (अक्षर के ऊपर खड़ी रेखा |)

बाह्य प्रयत्न सारणी (Quick Revision Table)

बाह्य प्रयत्नशामिल वर्ण (शॉर्ट ट्रिक)कुल वर्ण
विवार, श्वास, अघोषवर्ग का 1, 2 + श, ष, स13 वर्ण
संवार, नाद, घोषवर्ग का 3, 4, 5 + य, र, ल, व, ह20 वर्ण
अल्पप्राणवर्ग का 1, 3, 5 + य, र, ल, व19 वर्ण
महाप्राणवर्ग का 2, 4 + š, ष, स, ह14 वर्ण
उदात्त, अनुदात्त, स्वरितसभी स्वर (अ, इ, उ, ऋ…)9 स्वर

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