छंद किसे कहते है

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छंद

  • काव्य के व्याकरण को छन्द कहा जाता है
  • सर्वप्रथम प्रयोग ऋग्वेद में मिलता है
  • छन्द के प्रथम प्रणेता पिंगल ऋषि को माना जाता है
  • पिंगल ऋषि ने अपनी रचना छन्द सूत्रम् उल्लेख किया

छंद के अंग

  • छंद के सात अंग होते है
  1. चरण /पद
  2. वर्ण/मात्रा
  3. तुक
  4. लघु / गुरु
  5. यति (विराम)
  6. गति (लय)
  7. गण (संख्या क्रम)

उदाहरण
  • जाल परे जल जात वही, तजि मीरन को मोह 
  • रहिमन मछरी नीर को, तऊन छड़त दोह

छंद के सूत्र

  • यमाताराजभानसलगा
  • य मा ता रा ज भा न स ल गा
  • Ι    ζ    ζ   ζ   Ι    ζ    Ι    Ι   Ι    ζ

छंद के भेद

  • छंद के चार भेद होते है
  1. मात्रिक छन्द (मात्रा)
  2. वर्णिक छन्द (वर्ण)
  3. मुक्तक छन्द(बिना वर्ण, बिना मात्रा)

मात्रिक छंद (Matrik Chhand)

  • इसमें मात्राओ की गणना की जाती है

मात्रिक छंद के भेद

  • मात्रिक छन्द के तीन भेद होते है
  1. सम मात्रिक छन्द
  2. अर्द्ध सम मात्रिक छन्द
  3. विषम मात्रिक छन्द

सम मात्रिक छन्द

  1. चौपाई (16)
  2. रोला (24)
  3. गीतिका (26)
  4. हरिगीतिका (28)
  5. रूपमाला (24)
  6. वीर (आल्हा )छन्द(31)

चौपाई (16)

  • यह एक सममात्रिक छन्द है
  • इसमें चार चरण होते है
  • प्रत्येक चरण में 16 मत्राए होती है
  • प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु मत्राए (ςς) पायी जाती है
  • पहले चरण का तुक, दुसरे चरण से तथा तीसरे चरण का तुक, चौथे चरण से मिलता है
उदाहरण
  • जय हनुमान ज्ञान गुन सागर(16 मत्राए)
  • जय कपीस तिहुँ लोक उजागर (16 मत्राए)

अर्द्ध सम मात्रिक छन्द

  1. दोहा(13, 11, 13 11)
  2. सोरठा((11, 13, 11, 13)
  3. बरवै (12 ,7)
  4. उल्लाला(28) ⇒ 15, 13, 15, 13

दोहा

  • यह अर्ध-सममात्रिक छन्द है
  • इसमें चार चरण होते है
  • इसमें कुल 24 मत्राए होती है
  • पहले और तीसरे चरण में 13-13 मत्राए होती है
  • दुसरे और चौथे चरण में 11-11 मत्राए होती है

सोरठा

  • यह अर्ध-सममात्रिक छन्द है
  • इसमें चार चरण होते है
  • इसमें कुल 24 मत्राए होती है
  • पहले और तीसरे चरण में 11-11 मत्राए होती है
  • दुसरे और चौथे चरण में 13 -13 मत्राए होती है

बरवौ

  • यह अर्ध-सममात्रिक छन्द है
  • इसमें चार चरण होते है
  • इसमें कुल 19 मत्राए होती है
  • पहले और दूसरें चरण में 12-7 मत्राए होती है
  • तीसरे और चौथे चरण में 12 -7 मत्राए होती है

उल्लाला

  • यह अर्ध-सममात्रिक छन्द है
  • इसमें चार चरण होते है
  • इसमें कुल 28 मत्राए होती है
  • पहले और दूसरें चरण में 15-13 मत्राए होती है
  • तीसरे और चौथे चरण में 15 -13 मत्राए होती है

विषम मात्रिक

  • कुण्डलिया (दोहा + रोला)
  • छप्पय (दोहा + उल्लाला)

कुण्डलिया

  • यह विषम-मात्रिक छन्द है
  • यह दोहा + रोला से मिलकर बना है
  • इसमें छ: चरण होते है
  • प्रथम दो चरण दोहा और अन्तिम चार चरण रोला होता है

छप्पय

  • यह विषम-मात्रिक छन्द है
  • यह रोला + उल्लाला  से मिलकर बना है
  • इसमें छ: चरण होते है
  • प्रथम चार चरण रोला और अन्तिम दो  चरण उल्लाला होता है

वर्णिक छन्द

  • इसमें वर्णों की गणना की जाती है

वर्णिक छन्दव के भेद

इसके तीन भेद होते है

  1. सम वर्णिक
  2. अर्द्ध-सम वर्णिक
  3. विषम वर्णिक

सम वर्णिक के भेद

  1. साधारण सम वर्णिक
  2. दण्डक सम वर्णिक

साधारण सम वर्णिक

  • इसमें 1 से 26 तक के वर्ण होते है

दण्डक सम वर्णिक

इसमें 26 से अधिक वर्ण होते है

  • इन्द्रवज्रा (11)
  • उपेन्द्रवज्रा (11)
  • भुजंगी (11)
  • स्वागता (11)
  • वसन्त तिलका (14)
  • मनहर कविन्त
  • वंशस्थ
  • भुजंग प्रपात
  • द्रुत बिलम्बित (12)
  • मालिनी (15) ⇒ (7 + 8)
  • मद्राक्रान्ता (17) ⇒ (10 + 7)
  • सवैया
  • कविन्त  (31) ⇒ (16 + 15)

पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year MCQs)

नीचे दिए गए प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। इन्हें हल करके अपनी तैयारी जांचें।

Q1. छंद का सर्वप्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है?
A) यजुर्वेद
B) सामवेद
C) ऋग्वेद
D) अथर्ववेद

उत्तर: C (ऋग्वेद)


Q2. शिल्पगत आधार पर दोहे से उल्टा छंद कौन सा है?
A) रोला
B) चौपाई
C) सोरठा
D) बरवै

व्याख्या: जहां दोहे में पहले 13 फिर 11 मात्राएं होती हैं, वहीं सोरठे में पहले 11 फिर 13 मात्राएं होती हैं। इसलिए यह उल्टा है।
उत्तर: C (सोरठा)


Q3. ‘चौपाई’ छंद का पूर्व रूप क्या है?
A) पद्धड़िया
B) पञ्झटिका
C) अरिल्ल
D) चौपई

उत्तर: C (अरिल्ल)


Q4. निम्नलिखित पंक्तियों में कौन सा छंद है?
“मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ै गिरिवर गहन।
जासु कृपा सु दयाल, द्रवहु सकल कलिमल दहन।”
A) दोहा
B) चौपाई
C) सोरठा
D) बरवै

व्याख्या: इस पद्य में प्रथम चरण में 11 मात्राएं एवं द्वितीय चरण में 13 मात्राएं हैं, जो सोरठा का लक्षण है।
उत्तर: C (सोरठा)


Q5. अनुष्टुप् छंद में पांचवां अक्षर कैसा होता है?
A) गुरु
B) लघु
C) दीर्घ
D) उदात्त

व्याख्या: छंद शास्त्र के नियम (षष्ठं गुरु पञ्चमं लघु) के अनुसार पाँचवां अक्षर सदैव लघु होता है।
उत्तर: B (लघु)


अक्सर पूछे जाने वाले तथ्य (Quick Revision for Exams)

विषय (Topic)विवरण (Details)
छंद के प्रकारतीन प्रकार: मात्रिक, वर्णिक, मुक्त
दोहे की मात्राचरण 1 और 3 में 13, चरण 2 और 4 में 11
सोरठा की मात्राचरण 1 और 3 में 11, चरण 2 और 4 में 13
चौपाई की मात्राप्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ
अनुष्टुप का पाँचवाँ वर्णलघु होता है (Guru nahi hota)

निष्कर्ष

  • छंद हिंदी व्याकरण का वह अध्याय है जो भाषा को संगीतमय बनाता है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में दोहा, सोरठा, चौपाई और अनुष्टुप से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
  • उम्मीद है कि यह लेख आपकी तैयारी में सहायक होगा।
  • अधिक अभ्यास के लिए हिंदी साहित्य के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र अवश्य हल करें।

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