विमुद्रीकरण(Demonetization): अर्थ, उद्देश्य और प्रभाव
- विमुद्रीकरण आर्थिक नीति का एक ऐसा उपाय है जिसने भारत में हमेशा से चर्चा और बहस का केंद्र बना रहा है।
- यह विषय विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- इस लेख में, हम विमुद्रीकरण की अवधारणा, उसके उद्देश्यों, प्रभावों और परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों को समझेंगे।
विमुद्रीकरण क्या है? (What is Demonetization?)
- विमुद्रीकरण एक आर्थिक प्रक्रिया है जिसमें किसी देश की सरकार द्वारा मौजूदा मुद्रा के नोटों या सिक्कों का कानूनी मान्यता समाप्त कर दी जाती है।
- सरल शब्दों में, जब सरकार किसी विशेष मूल्य के नोट को चलन से बाहर कर देती है, तो उसे विमुद्रीकरण कहते हैं। इसके बाद उन नोटों से लेन-देन करना अवैध हो जाता है।
भारत में विमुद्रीकरण का इतिहास (History of Demonetization in India)
- 1946: पहली बार 1000 रुपये और 10000 रुपये के नोट बंद किए गए।
- 1978: जनता पार्टी की सरकार ने 1000, 5000 और 10000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण किया।
- 2016: सबसे चर्चित विमुद्रीकरण 8 नवंबर, 2016 की रात को Prime Minister नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया, जिसमें 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया।
2016 के विमुद्रीकरण के उद्देश्य (Objectives of 2016 Demonetization)
- कालाधन (Black Money) पर अंकुश लगाना: नोटबंदी का सबसे बड़ा उद्देश्य देश में जमा कालाधन को बेअसर करना था।
- नकली मुद्रा (Fake Currency) का खात्मा: आतंकवाद और गैर-कानूनी गतिविधियों को फंडिंग करने वाले नकली नोटों की समस्या को जड़ से खत्म करना।
- भ्रष्टाचार (Corruption) पर रोक: नकद लेनदेन पर निर्भर भ्रष्टाचार को कम करना।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) को बढ़ावा: डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करके अर्थव्यवस्था को फॉर्मलाइज करना।
- कर संग्रह (Tax Collection) में वृद्धि: लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर टैक्स कम्प्लायंस बढ़ाना।
विमुद्रीकरण के प्रभाव (Effects of Demonetization)
सकारात्मक प्रभाव (Positive Effects):
- करदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- डिजिटल लेनदेन और डिजिटल पेमेंट्स को बड़ा प्रोत्साहन मिला।
- बैंकों में जमा राशि में अचानक वृद्धि से सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ी।
- रियल एस्टेट सेक्टर में कीमतें कम हुईं।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Effects):
- अर्थव्यवस्था में अल्पकालिक रूप से नकदी की भारी कमी (Cash Crunch) हुई।
- आम जनता को लंबी-लंबी कतारों का सामना करना पड़ा।
- एमएसएमई (MSME) और अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) को गहरा झटका लगा।
- रोजगार और उत्पादन पर असर पड़ा।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी विमुद्रीकरण पर आधिकारिक रिपोर्ट देखने के लिए आरबीआई की वेबसाइट देखें। RBI
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (Previous Year Questions for Competitive Exams)
- यहाँ विमुद्रीकरण से संबंधित पूछे जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:
Que1. भारत में 2016 का विमुद्रीकरण किस तारीख को घोषित किया गया था?
(a) 26 अक्टूबर, 2016
(b) 8 नवंबर, 2016
(c) 31 दिसंबर, 2016
(d) 1 जनवरी, 2017
उत्तर: (b) 8 नवंबर, 2016
Que2. 2016 के विमुद्रीकरण में किस मूल्यवर्ग के नोट बंद किए गए थे?
(a) 100 और 500 रुपये
(b) 500 और 1000 रुपये
(c) 200 और 2000 रुपये
(d) 1000 और 5000 रुपये
उत्तर: (b) 500 और 1000 रुपये
Que3. विमुद्रीकरण का मुख्य उद्देश्य नहीं था:
(a) कालाधन रोकना
(b) नकली मुद्रा रोकना
(c) बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना
(d) डिजिटल लेनदेन बढ़ाना
उत्तर: (c) बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना
Que4. विमुद्रीकरण के बाद कौन-सा नया नोट जारी किया गया?
(a) 100 रुपये का नया नोट
(b) 2000 रुपये का नया नोट
(c) 5000 रुपये का नया नोट
(d) 10000 रुपये का नया नोट
उत्तर: (b) 2000 रुपये का नया नोट
Que5. विमुद्रीकरण का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव किस क्षेत्र पर पड़ा?
(a) आईटी सेक्टर
(b) अनौपचारिक क्षेत्र और छोटे व्यवसाय
(c) कृषि क्षेत्र
(d) स्वास्थ्य सेवा
उत्तर: (b) अनौपचारिक क्षेत्र और छोटे व्यवसाय
निष्कर्ष (Conclusion)
- विमुद्रीकरण भारत की आर्थिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिले। इसने अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण और डिजिटलीकरण को गति दी, लेकिन साथ ही इसकी कुछ short-term कीमत भी चुकानी पड़ी।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इसके उद्देश्यों, प्रभावों और इतिहास की गहन समझ आवश्यक है।
- इस लेख में दी गई जानकारी और प्रश्नोत्तरी आपकी तैयारी को मजबूती प्रदान करेगी।
