| जन्म | 30 जनवरी 1889 |
|---|---|
| जन्म स्थान | काशी (उत्तर प्रदेश) |
| पिता | बाबू देवकी प्रसाद |
| प्रथम रचना | चित्र रेखा (1906) |
| पुरस्कार | मंगलाप्रसाद पारितोषिक |
| प्रमुख रचना | कामायनी, आँशू, लहर, झरना |
| मृत्य | 15 नवंबर 1937 |
कहानी संग्रह
- पुरस्कार
- आंधी
- इन्द्रजाल
- छाया
- आकाशदीप
- प्रतिध्वनि
- सुनहरा सांप
- देवरथ
- गुडा
काव्य संग्रह
- पहली कविता ‘चित्ररेखा‘ 1906 में प्रकाशित हुई
- आंसू (1925): करुणा और शोक से भरा काव्य संग्रह ।
- लहर (1933): प्रेम और सौंदर्य का सजीव चित्रण ।
- झरना (1918): देशभक्ति और वीर रस की प्रधानता ।
- उर्वशी
- प्रेमपथिक
- वनामिलन
- अयोध्या का उद्वार
- प्रेमराज्य
- महाराणा का महत्व
- कानन कुसुम
- महाराणा का महत्त्व
महाकाव्य
- कामायनी (1935-36)
नाटक
- अज्ञातशत्रु
- चन्द्रगुप्त
- स्कन्दगुप्त
- ध्रुवस्वामिनी
- कामना
- प्रायश्चित
- कल्याणी
- विशाख
- परिणय
- जन्मेजय का नाग यज्ञ
उपन्यास
- कंकाल
- तितली
- इरावती (अधूरा)
एकांकी
- एक छूट
जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय
- जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी, 1889 को काशी (उत्तर प्रदेश) में हुआ
- इनके पिता का नाम देवी प्रसाद था।
- इन्होंने घर पर ही हिन्दी संस्कृत और फारसी का अध्ययन किया
- इनका बचपन से ही साहितिक रचना रूचि था
- इन्होंने 12 वर्ष की अवस्था में कविता लेखन शुरू कर दिया था
- इनकी प्रथम कविता ‘चित्ररेखा‘ 1906 में प्रकाशित हुई
- जय शंकर प्रसाद को छायावाद का प्रवर्तक माना जाता है
- जय शंकर प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे
- इन्होंने ने हिन्दी साहित्य के विभिन्न विधाओं में रचनाएँ किये है
- इनकी मृत्यु 15 नवंबर 1937 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश )में हो गयी।
पुरस्कार और सम्मान:
- इन्हें महाकाव्य ‘कामायनी’ के लिए मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
जयशंकर प्रसाद की भाषा
- इनकी भाषा सरल सहज और प्रभावशाली थी
- इनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ और तत्सम शब्दों से युक्त है।
- इनके अधिकांश साहित्यिक रचना हिन्दी भाषा में हुआ है
साहित्य में स्थान
- इनका हिन्दी साहित्य में विशेष स्थान है।
- इन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी।
- ये कहानीकार, नाटककार, उपन्यासकार आदि बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार थे
जय शंकर प्रसाद की विशेषताएँ
- ये छायावाद युग के प्रणेता माने जाते है
- इनकी भाषा सरल सहज और प्रभावशाली थी
जय शंकर प्रसाद का निधन
- 15 नवंबर 1937 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश )में इनकी मृत्यु हो गयी।
अक्सर पूछे जाने वाले तथ्य (Quick Revision)
| विषय | विवरण |
|---|---|
| जन्म तिथि | 30 जनवरी, 1889 (वाराणसी) |
| मृत्यु तिथि | 15 नवंबर, 1937 |
| प्रसिद्ध महाकाव्य | कामायनी (इसमें मनु, श्रद्धा, इड़ा हैं) |
| प्रमुख कविता संग्रह | आंसू, लहर, झरना |
| अंतिम नाटक | ध्रुवस्वामिनी |
| ऐतिहासिक नाटक | चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त |
| उपन्यास | कंकाल, तितली |
पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year MCQs)
नीचे दिए गए प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। इन्हें हल करके अपनी तैयारी जांचें।
Q1. प्रसिद्ध पुस्तक “कंकाल” के लेखक कौन हैं?
A) केतन भगत
B) महेश राव
C) निर्मल वर्मा
D) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: D (जयशंकर प्रसाद)
Q2. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित अंतिम नाटक (Last Drama) कौन सा है?
A) चंद्रगुप्त
B) अजातशत्रु
C) स्कंदगुप्त
D) ध्रुवस्वामिनी
उत्तर: D
व्याख्या:
- हालांकि इनमें से कई नाटक प्रसिद्ध हैं, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों और साहित्यिक इतिहास के अनुसार, प्रसाद जी का अंतिम नाटक ध्रुवस्वामिनी (Dhruvswamini) है ।
Q3. “कामायनी” महाकाव्य की नायिका (या प्रमुख स्त्री पात्र) कौन है?
(Who is the main female character in the epic Kamayani?)
A) उर्वशी
B) शकुंतला
C) श्रद्धा
D) यशोधरा
उत्तर: C (श्रद्धा)
Q4. जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के किस काल/वाद के कवि थे?
(Jaishankar Prasad was a poet of which literary school?)
A) द्विवेदी युग
B) भक्तिकाल
C) प्रगतिवाद
D) छायावाद
उत्तर: D (छायावाद)
Q5. पुरस्कार कहानी के लेखक कौन है?
A) महादेवी वर्मा
B) जय शंकर प्रसाद √
C) सुभद्राकुमारी चौहान
D) रामधारी सिंह दिनकर
Q6. जयशंकर प्रसाद जी की महाकाव्य है?
A) साकेत
B) आनंदमठ
C) कामायनी √
D) गोदान
निष्कर्ष
- जयशंकर प्रसाद को स्मरण करने का सबसे सरल तरीका है: “कामायनी” के रचयिता, ध्रुवस्वामिनी के लेखक, और छायावाद के प्रहरी। प्रतियोगी परीक्षाओं में उनसे संबंधित प्रश्न अक्सर ‘रचना और लेखक’ तथा ‘नाटकों के नाम’ पर आधारित होते हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपकी तैयारी में सहायक होगा। अधिक अभ्यास के लिए हिंदी साहित्य के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र अवश्य हल करें।
