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लोथल: एक परिचय
- लोथल गुजरात के भाल क्षेत्र में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता (3300-1300 ई.पू.) का प्रमुख शहर था।
- इसकी खोज 1954 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एस.आर. राव ने की।
- यह विश्व के प्राचीनतम बंदरगाहों में से एक माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ एवं खोज
1. शहर नियोजन
- दुर्ग क्षेत्र (Acropolis): ऊँचाई पर बसे प्रशासनिक भवन और अन्नागार।
- निचला शहर: व्यापारिक व आवासीय क्षेत्र, जालीदार सड़कें।
- जल निकासी व्यवस्था: घरों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए पक्की नालियाँ।
2. गोदीबाड़ा (Dockyard)
- विश्व का प्रथम ज्वार-आधारित बंदरगाह।
- आयाम: 214 मीटर लंबा, 36 मीटर चौड़ा, 4.26 मीटर गहरा।
- विशेषता: जहाजों के प्रवेश के लिए दरवाजे, जल स्तर नियंत्रण हेतु नहरें।
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| मनके बनाना | कार्नेलियन, सोना, ताँबे के मनके |
| धातु शिल्प | काँस्य उपकरण, ताँबे की वस्तुएँ |
| व्यापार | मेसोपोटामिया, फारस से व्यापार (मुहरों व मनकों के साक्ष्य) |
पुरातात्विक अवशेष
- अन्नागार: दुर्ग क्षेत्र में 3.5 मीटर ऊँचा गोदाम, जिसमें 12 कक्ष थे।
- अग्नि वेदिकाएँ: यज्ञ कुंड जो धार्मिक कर्मकांड की ओर संकेत करते हैं।
- मुहरें: एक श्रृंगी बैल वाली प्रसिद्ध मुहर (सिंधु लिपि में अंकित)।
- दफन स्थल: शवाधान के साक्ष्य (शवों के साथ मिट्टी के बर्तन)।
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| स्थान | साबरमती नदी के तट पर, गुजरात |
| काल | 2400-1900 ई.पू. (परिपक्व हड़प्पा काल) |
| खोजकर्ता | एस.आर. राव (1954-62) |
| विशिष्टता | जहाज बनाने के साक्ष्य (डॉकयार्ड से जुड़ा कारखाना) |
| महत्वपूर्ण नमूने | चावल के दाने (प्राचीनतम साक्ष्य), मिट्टी का जहाज मॉडल |
पतन के कारण
- प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़ (भूगर्भीय साक्ष्य)।
- जलवायु परिवर्तन: सरस्वती नदी का सूखना।
- व्यापार मार्गों में बदलाव।
वर्तमान में लोथल
- पुरातत्व पार्क: ASI द्वारा संरक्षित, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के लिए प्रस्तावित।
- संग्रहालय: मुहरें, मूर्तियाँ, उपकरणों का प्रदर्शन।
डॉ. एस.आर. राव के अनुसार:
- “लोथल न केवल भारत बल्कि विश्व की समुद्री इतिहास में एक मील का पत्थर है।”
FAQ
Q: लोथल किस नदी के किनारे स्थित है?
- Ans: साबरमती नदी
Q: लोथल की खोज किसने की?
- Ans: एस.आर. राव (1954)
