संस्कृत भाषा परिचय | Sanskrit Bhasha Prichaya

संस्कृत भाषा परिचय

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  • सम् + कृ + क्त शब्दो से मिलकर बना है
  • सम् उपसर्ग, कृ धातु, क्त प्रत्यय = संस्कृतम्
  • संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है
  • इसे देव-भाषा/ देव-वाणी/ भारती भी कहा जाता है

भाषा के प्रकार

  • तीन प्रकार के होते है
  1. मैखिक
  2. लिखित
  3. संकेतिक

नियम

  • परिवर्तनीय हो सकते है

सिद्धान्त

  • अपरिवर्तनीय होते है
  • यह सर्वभौमिक होते है

व्याकरण

  • नियमों और सिद्धान्त के लिखित स्वरूप को व्याकरण कहते है
  • परिभाषा सूत्र: "व्याक्रियन्ते व्युत्पाद्यन्ते शब्दाः अनेन इति व्याकरणम्।"

वि + आङ् + डुकृञ् + ल्युट्

वि+ आ +कृ + यु

व्या + कर् + अन

व्याकरणम्

व्याकरण की परम्परा

  • बार्हस्पती परम्परा(व्याकरण की आदि परम्परा)
  • माहेश्वरी परम्परा(शैव परम्परा)

बार्हस्पती परम्परा

ब्रह्मा –> वृहस्पति –> इन्द्र –>देवताओ –> ऋषि –>ब्रह्मण

माहेश्वरी परम्परा

  • प्रतिपादक भगवान शिव

व्याकरण के त्रिमुनि

  1. पाणिनी
  2. कात्यायन (वररूचि)
  3. पतंजलि

व्याकरण के त्रिमुनि की पुस्तक

त्रिमुनितदुक्ति (पुस्तक)
पाणिनीअष्टाध्यायी
कात्यायनवार्तिक
पतंजलिमहाभाष्यम्

भगवान पाणिनी(500 ई.पू.)

जन्मस्थान शलातुर (पाकिस्तान)

माता दाक्षी

रचना अष्टाध्यायी

अष्टाध्यायी

आठ अध्याय

चार पाद

कुल पाद 8*4 =32 पाद


कात्यायन (350 ई.पू.)

जन्मस्थान दक्षिणीे भारत

माता

रचना वार्तिक (वार्तिकानि)

दूसरा नाम वररूचि

वार्तिक(836)


पतंजलि(200 ई.पू.)

जन्मस्थान दक्षिणीे भारत

माता

रचना , महाभाष्यम्, योगसूत्र

दूसरा नाम वररूचि

महाभाष्यम् 84/85 आह्निक


अन्य लेखक

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी – श्री भट्टोजी दीक्षित

पौढ़ मनोरमा – श्री भट्टोजी दीक्षित

लघु सिद्धान्त कौमुदी – वरदराजाचार्य

मध्य सिद्धान्त कौमुदी – वरदराजाचार्य


संस्कृत

संस्कृत में महेश्वर सुत्र के अनुसार स्वरों की कुल संख्या 9 है

सुत्र 4

व्यंजन की संख्या

सूत्र 10

शल् :

इसके अंतर्गत ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) आते हैं।

यण् :

इसके अंतर्गत अंतस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) आते हैं।

नोट 

  • माहेश्वर सूत्रों के अनुसार: स्वरों की कुल संख्या 9 (नौ) है, जिन्हें ‘अच्’ प्रत्याहार कहा जाता है।
  • संस्कृत भाषा/सामान्य व्याकरण में: स्वरों की कुल संख्या 13 (तेरह) मानी जाती है (इसमें दीर्घ रूप ऋ और ॡ के भेद भी जुड़ जाते हैं)।

मूल स्वर (ह्रस्व स्वर):

  • इनकी संख्या 5 है। इसके लिए ‘अक्’ प्रत्याहार का प्रयोग होता है।

  • वर्ण: अ, इ, उ, ऋ, ऌ

संयुक्त स्वर

संयुक्त स्वर की संख्या 4 है।

इसके लिए ‘एच्’ प्रत्याहार का प्रयोग होता है।

  • वर्ण: ए, ओ, ऐ, औ

दीर्घ स्वर

  • आठ दीर्घ स्वर होते है

आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

संस्कृत वर्णमाला में कुल स्वरों की संख्या

संस्कृत वर्णमाला में कुल स्वरों की संख्या 13 है

अ, इ, उ, ऋ, ऌ, आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

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