संस्कृत व्यंजन वर्ण | Sanskrit Vyanjana varna

संस्कृत व्यंजन वर्ण(हल्)

Home > संस्कृत व्याकरण

हल् प्रत्याहार में उपस्थित वर्णों को व्यंजन वर्ण कहते है।

व्यंजन वर्ण के प्रकार

  1. स्पर्श वर्ण
  2. अन्तःस्थ वर्ण
  3. ऊष्म वर्ण

व्यंजन वर्ण की संख्या

स्पर्श वर्ण (25)

अन्तःस्थ वर्ण (4)

ऊष्म वर्ण (4)

व्यंजन वर्ण की कुल संख्या (25+4+4)= 33

1. स्पर्श वर्ण

  • संख्या 25
  • इसे वर्गीय वर्ण भी कहते है
  • इसे उदित वर्ण भी कहते है

स्पर्श वर्ण

कु (क वर्ग)क्ख्ग्घ्
चु (च वर्ग)च्छ्ज्झ्ञ्
टु (ट वर्ग)ट्ठ्ड्ढ्ण्
तु (तु वर्ग)त्थ्द्ध्न्
पु (प वर्ग)प्फ्ब्भ्म्

2. अन्तःस्थ वर्ण (यण् वर्ण)

  • इन वर्णों को बोलने पर वायु मुख के अंदर विद्यमान रहती है।
  • इसे यण् प्रत्याहार जिसके कारण इसे यण् वर्ण भी कहा जाता है।

संख्या 4

य् व् र् ल्

3. ऊष्म वर्ण (शल् वर्ण)

  • ऊष्म वर्णों को बोलने पर वायु मुख से अधिक घर्षण के साथ बाहर निकलती है

संख्या 4

श् ष् स् ह्

संस्कृत वर्णमाला वर्णों की संख्या

स्वर =13

व्यंजन =33

13+33= 46

संस्कृत वर्णमाला में कुल वर्णों की संख्या= 46

अयोगवाह

  • यह वर्णमाला में नही है

संख्या 4

  1. ं (अनुस्वर)
  2. ः (विसर्ग)
  3.  अर्द्धविसर्ग(जिह्वामूली, उपध्मानीय)
  4. यम्

Leave a comment

error: Content is protected !!