थॉर्नडाइक (Thorndike)
परिचय
एडवर्ड ली थॉर्नडाइक (Edward Lee Thorndike) अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्हें “आधुनिक शैक्षिक मनोविज्ञान का जनक” कहा जाता है।
थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत (Trial & Error Theory)
प्रसिद्ध प्रयोग – बिल्ली और पहेली बॉक्स (Cat & Puzzle Box)
थॉर्नडाइक ने एक भूखी बिल्ली को पहेली बॉक्स में बंद किया। बाहर खाना रखा था। बिल्ली बॉक्स से बाहर निकलने के लिए इधर-उधर भागी – दौड़ी, खरोंचा, उछली। कई असफल प्रयासों (त्रुटियों) के बाद गलती से उसने दरवाज़े का बटन दबा दिया और बाहर निकल गई। बार-बार इस प्रक्रिया से वह त्रुटियाँ कम करती गई और अंततः सीख गई कि बटन दबाने से खाना मिलता है।
सीखने का निष्कर्ष:
“सीखना उत्तेजना और प्रतिक्रिया के बीच संबंध (S-R Bond) स्थापित करने की प्रक्रिया है, जो बार-बार प्रयास और त्रुटियों से होती है।”
इस सिद्धांत के चार मुख्य चरण:
- लक्ष्य (Goal) – बिल्ली को भूख (प्रेरणा)
- बाधा (Barrier) – बॉक्स में बंद होना
- यादृच्छिक प्रयास (Random Efforts) – इधर-उधर भागना, त्रुटियाँ करना
- सफलता एवं सीख (Success & Learning) – बटन दबाने से निकलना और याद रखना
परीक्षा ट्रिक: इस सिद्धांत को “S-R Bond Theory” या “Connectionism” भी कहते हैं।
थॉर्नडाइक के अधिगम मुख्य नियम (Laws of Learning)
थार्नडाइक ने अधिगम के तीन मुख्य नियम दिये
- प्रभाव का नियम (Law of Effect)
- अभ्यास का नियम (Law of Exercise)
- तत्परता का नियम (Law of Readiness)
प्रभाव का नियम (Law of Effect)
सीखना तब मजबूत होता है जब परिणाम संतोषजनक हो।
उदाहरण
सही उत्तर देने पर वाह-वाह मिले → बच्चा अधिक सीखेगा।
अभ्यास का नियम (Law of Exercise)
जितना अधिक अभ्यास करोगे, सीख उतनी ही स्थायी होगी।
उदाहरण
गुणा सीखने के लिए रोज़ पहाड़े याद करना।
तत्परता का नियम (Law of Readiness)
जब शिक्षार्थी सीखने के लिए तैयार हो, तभी सीखना प्रभावी होता है।
उदाहरण
जिज्ञासु मन से पढ़ने वाला बच्चा जल्दी सीखता है।
गौण नियम (Secondary Laws)
थार्नडाइक ने अधिगम के पांच गौण नियम दिये
- बहु-अनुक्रिया का नियम (Multiple Response)
- आंशिक गतिविधि का नियम (Partial Activity)
- बहु-अनुक्रिया का नियम (Multiple Response) – एक ही समस्या के कई हल निकालना
- सेट या दृष्टिकोण का नियम (Set or Attitude) – मानसिक तैयारी
- आंशिक गतिविधि का नियम (Partial Activity) – संपूर्ण के बजाय भागों को सीखना
थॉर्नडाइक के सिद्धांत की शैक्षिक उपयोगिता
- त्रुटियों को सीखने का हिस्सा मानना चाहिए, सज़ा नहीं देनी चाहिए।
- पुरस्कार और प्रशंसा (प्रभाव का नियम) से सीखना तेज़ होता है।
- अभ्यास कार्यपुस्तिकाएँ देनी चाहिए।
- पढ़ने के लिए मानसिक तत्परता बनाना ज़रूरी है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year PYQs)
प्रश्न 1:
“बार-बार अभ्यास करने पर एक छात्र शुद्ध लिखना सीख जाता है। थॉर्नडाइक के अनुसार यह किस नियम का उदाहरण है?”
(CTET 2018, Paper 1)
(a) प्रभाव का नियम
(b) अभ्यास का नियम
(c) तत्परता का नियम
(d) बहु-अनुक्रिया का नियम
उत्तर: (b) अभ्यास का नियम
प्रश्न 2:
“थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोग में किस जानवर का उपयोग किया था?”
(REET 2022, Level 2)
(a) चूहा
(b) कबूतर
(c) बिल्ली
(d) कुत्ता
उत्तर: (c) बिल्ली – पहेली बॉक्स प्रयोग
प्रश्न 3
“एक शिक्षक पाठ शुरू करने से पहले छात्रों का ध्यान आकर्षित करता है। थॉर्नडाइक के किस नियम का पालन किया जा रहा है?”
(UPTET 2019):
उत्तर: तत्परता का नियम (Law of Readiness)
प्रश्न 4:
“प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत को किस अन्य नाम से जाना जाता है?”
(CTET 2016, Paper 2)
(a) क्लासिकल कंडीशनिंग
(b) ऑपरेंट कंडीशनिंग
(c) S-R कनेक्शनवाद
(d) गेस्टाल्ट सिद्धांत
उत्तर: (c) S-R कनेक्शनवाद (S-R Connectionism)
प्रश्न 5
“बच्चा जब पहली बार साइकिल चलाना सीखता है, तो बार-बार गिरता है, पर धीरे-धीरे संतुलन बना लेता है। यह किस सिद्धांत की व्याख्या करता है?”
(MPTET 2020):
उत्तर: थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत (Trial & Error)
| विषय | थॉर्नडाइक | पावलव | स्किनर |
|---|---|---|---|
| सिद्धांत | Trial & Error / S-R Bond | Classical Conditioning | Operant Conditioning |
| मुख्य क्रिया | यादृच्छिक प्रयास | अनैच्छिक प्रतिक्रिया (लार) | सुदृढीकरण (Reinforcement) |
| प्रसिद्ध प्रयोग | बिल्ली – पहेली बॉक्स | कुत्ता – घंटी | चूहा – स्किनर बॉक्स |
निष्कर्ष (Conclusion)
थॉर्नडाइक के सिद्धांत बताते हैं कि सीखना एक क्रमिक, यांत्रिक और त्रुटियों से भरा हुआ प्रक्रिया है, लेकिन सही नियमों (प्रभाव, अभ्यास, तत्परता) को अपनाकर किसी को भी सीखाया जा सकता है। CTET, UPTET, REET में प्रश्न अक्सर उदाहरणों पर आधारित होते हैं – अतः हर नियम के उदाहरण याद रखें।
महत्वपूर्ण: थॉर्नडाइक ने “शिक्षा मनोविज्ञान” नामक पुस्तक लिखी और उन्हें “अधिगम मनोविज्ञान का जनक” भी कहा जाता है।