वर्णिक छंद क्या है? | वर्णिक छंद (Varnik Chhand) पूर्ण जानकारी प्रकार और उदाहरण सहित

वर्णिक छंद: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

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वर्णिक छंद (Varnik Chhand)

  • वर्णिक छंद हिंदी काव्य की वह शैली है जिसमें वर्णों (अक्षरों) की संख्या के आधार पर कविता की रचना की जाती है।
  • प्रत्येक चरण में वर्णो की संख्या निश्चित होती है।
  • यह मात्रिक छंद से भिन्न होता है, जहाँ मात्राओं की गणना महत्वपूर्ण होती है।

 वर्णिक छंद (Varnik Chhand) की प्रमुख विशेषताएँ

  • वर्ण आधारित:⇒ प्रत्येक पंक्ति में वर्णों की निश्चित संख्या
  • गण-विभाजन:⇒ वर्णों को विशिष्ट गणों में विभाजित किया जाता है
  • यति-गति:⇒ पाठ की लय और विराम के निश्चित नियम
  • ओजस्विता:⇒ वीर रस की अभिव्यक्ति के लिए विशेष उपयुक्त

 वर्णिक छंद (Varnik Chhand) के प्रमुख प्रकार

  • सवैया छंद
  • कवित्त छंद

सवैया छंद

  • प्रत्येक चरण में 22-24 वर्ण
  • यह वीर रस की अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

उदाहरण:

  • “करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान”

कवित्त छंद

  • प्रत्येक चरण में 31-33 वर्ण
  • मुख्यतः श्रृंगार और भक्ति रस में प्रयुक्त होता है

उदाहरण:

  • “बूँद समान जो पड़त है धरा पर, सो मिल जात है सागर में”

वर्णिक और मात्रिक छंद में अंतर

विशेषतावर्णिक छंदमात्रिक छंद
आधारवर्णमात्रा
गणनावर्ण संख्यामात्रा संख्या
प्रवाहवर्ण भार परमात्रा भार पर
उदाहरणसवैया, कवित्तदोहा, चौपाई

वर्णिक छंद का ऐतिहासिक महत्व

  • यह संस्कृत छंद शास्त्र का हिंदी में रूपांतरण है
  • यह भारतेन्दु युग और द्विवेदी युग की प्रमुख काव्य शैली था
  • यह वीरगाथा काल का प्रमुख अभिव्यक्ति माध्यम था
  • आधुनिक हिंदी कविता में इसका प्रभाव है

वर्णिक छंद के प्रयोग के लाभ

  • भाषा की संरचनात्मक सुदृढ़ता
  • काव्य में नियमित लय और प्रवाह
  • श्रोताओं पर स्थायी प्रभाव
  • कवि की तकनीकी कुशलता का प्रदर्शन

वर्णिक छन्द

  • इसमें वर्णों की गणना की जाती है

वर्णिक छन्दव के भेद

इसके तीन भेद होते है

  1. सम वर्णिक
  2. अर्द्ध-सम वर्णिक
  3. विषम वर्णिक

सम वर्णिक के भेद

  1. साधारण सम वर्णिक
  2. दण्डक सम वर्णिक

साधारण सम वर्णिक

  • इसमें 1 से 26 तक के वर्ण होते है

दण्डक सम वर्णिक

इसमें 26 से अधिक वर्ण होते है

  • इन्द्रवज्रा (11)
  • उपेन्द्रवज्रा (11)
  • भुजंगी (11)
  • स्वागता (11)
  • वसन्त तिलका (14)
  • मनहर कविन्त
  • वंशस्थ
  • भुजंग प्रपात
  • द्रुत बिलम्बित (12)
  • मालिनी (15) ⇒ (7 + 8)
  • मद्राक्रान्ता (17) ⇒ (10 + 7)
  • सवैया
  • कविन्त  (31) ⇒ (16 + 15)

अनुष्टुप् (Anushtup – संस्कृत/हिंदी वर्णिक)

यह अत्यंत प्राचीन वर्णिक छंद है।

  • नियम: प्रत्येक चरण में 8 वर्ण होते हैं। लक्षण है “सर्वत्र लघु पञ्चमम्” अर्थात प्रत्येक चरण का पांचवां अक्षर हमेशा लघु होता है और छठा अक्षर गुरु होता है ।

  • विशेष: दूसरे और चौथे चरण का सातवां अक्षर लघु होता है ।

वसन्ततिलका (Vasantatilaka)

यह संस्कृत और हिंदी का प्रसिद्ध वर्णिक छंद है।

  • नियम: प्रत्येक चरण में गणों की संख्या होती है। विशेष रूप से इसमें ‘त’, ‘भ’, ‘ग’, ‘न’, ‘ग’, ‘ग’ गणों का क्रम होता है। उदाहरण स्वरूप प्रसिद्ध पंक्तियाँ इसी छंद में हैं ।

निष्कर्ष

  • वर्णिक छंद हिंदी काव्य की एक परिष्कृत विधा है जो कवि को भाषा के साथ सृजनात्मक प्रयोग का अवसर देती है।
  • यह छंद हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा का प्रमाण है और आज भी अनेक कवियों द्वारा प्रयुक्त होता है।
  • छंद विधा में निपुणता प्राप्त करने के लिए वर्णिक छंद का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

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