बरवै छंद(barwe chhand):
बरवै छंद क्या है?
- बरवै छंद हिंदी काव्य का एक प्रसिद्ध मात्रिक छंद है, जिसका प्रयोग अक्सर दोहों के साथ किया जाता है। यह छंद भक्ति, श्रृंगार और नीति संबंधी विषयों को व्यक्त करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
बरवै छंद की परिभाषा
बरवै छंद में कुल 12 मात्राएँ होती हैं, जो दो चरणों (पंक्तियों) में विभाजित होती हैं। इसके प्रत्येक चरण में 6-6 मात्राएँ होती हैं और अंत में तुक (समान अंत) का प्रयोग किया जाता है।
बरवै छंद के लक्षण
मात्रा संरचना:⇒ 6-6 (कुल 12 मात्राएँ)।
तुकांत:⇒ दोनों चरणों में समान अंत (तुक) होता है।
भावपूर्ण:⇒ इसमें नीति, भक्ति और जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जाता है।
लयबद्धता:⇒ यह छंद गेय होता है और इसे गाकर सुनाया जा सकता है।
बरवै छंद के उदाहरण
उदाहरण (श्रृंगार):
“नैनन की कोर सुधा रस बरसै,
मुख मधुर मधुर मृदु बोल बतरसै।”
उदाहरण (नीति):
“धीरज धरम मित्र अरु नारी,
आपतकाल परखिए चारी।”
उदाहरण (भक्ति रस):
“जो नर दुख में दुख नहिं मानै,
सुख सनेह अरु भय नहिं जानै।”
बरवै छंद का सबसे सुंदर और प्रामाणिक उदाहरण महाकवि तुलसीदास जी की रचना ‘बरवै रामायण’ से मिलता है:
चम्पक हरवा अंग मिलि, अधिक सुहाय। जाहि परसियै हिरेइ, जब कुम्हिलाय।
आइए इसकी मात्राएँ गिनकर नियम की पुष्टि करते हैं:
प्रथम पंक्ति की गणना:
पहला चरण (12 मात्राएँ): च (2 – अं की बिंदी के कारण) + म्प (1) + क (1) = 4
ह (1) + र (1) + वा (2) = 4
अं (2) + ग (1) = 3
मि (1) + लि (1) = 2
(कुल: मात्राएँ) -> नोट: बोलचाल और काव्य प्रवाह में ‘अंग’ या ‘मिलि’ के लघु-गुरु उच्चारण के आधार पर यहाँ शुद्ध 12 मात्राएँ का विन्यास बैठता है।
दूसरा चरण (7 मात्राएँ): अ (1) + धि (1) + क (1) = 3
सु (1) + हा (2) + य (1) = 4
(कुल: मात्राएँ) — अंत में ‘सुहाय’ () जगण है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Points)
अवधी का निजी छंद: यदि परीक्षा में पूछा जाए कि “अवधी भाषा का निजी छंद किसे माना जाता है?”, तो उत्तर बरवै होगा।
तुलसीदास और रहीमदास: बरवै छंद को लोकप्रिय बनाने का श्रेय रहीमदास जी को जाता है (उनकी रचना: बरवै नायिका भेद)। रहीम के बरवै छंदों से प्रभावित होकर ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने ‘बरवै रामायण’ की रचना की थी।
सोरठा से तुलना: सोरठा में और मात्राएँ होती हैं, जबकि बरवै में और मात्राएँ होती हैं। दोनों ही अर्धसम मात्रिक छंद हैं, इसलिए परीक्षा के विकल्पों में ये साथ-साथ आते हैं।
प्रश्न 1: बरवै किस प्रकार का छंद है?
(A) सम मात्रिक छंद
(B) अर्धसम मात्रिक छंद
(C) विषम मात्रिक छंद
(D) वर्णिक छंद
उत्तर: (B) अर्धसम मात्रिक छंद
व्याख्या: यह UPSSSC कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) और वन रक्षक परीक्षा में पूछा गया है। अर्धसम मात्रिक छंद वे होते हैं जिनके पहले-तीसरे (विषम) चरणों में समान मात्राएँ और दूसरे-चौथे (सम) चरणों में अलग लेकिन आपस में समान मात्राएँ होती हैं। बरवै इसी श्रेणी में आता है।
प्रश्न 2: अवधी का निजी छंद किसे माना जाता है?
(A) कवित्त
(B) रोला
(C) छप्पय
(D) बरवै
उत्तर: (D) बरवै
व्याख्या: यह प्रश्न यू.पी. के एग्जाम्स का पेटेंट प्रश्न है। अवधी भाषा के लोक-साहित्य और काव्य में इस छंद का प्रयोग सबसे ज्यादा हुआ है। महाकवि तुलसीदास जी की रचना ‘बरवै रामायण’ और रहीमदास जी की ‘बरवै नायिका भेद’ इसके सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं।
प्रश्न 3: बरवै छंद के विषम (पहले और तीसरे) तथा सम (दूसरे और चौथे) चरणों में क्रमशः कितनी-कितनी मात्राएँ होती हैं?
(A) 11 और 13 मात्राएँ
(B) 13 और 11 मात्राएँ
(C) 12 और 7 मात्राएँ
(D) 15 और 12 मात्राएँ
उत्तर: (C) 12 और 7 मात्राएँ
व्याख्या: बरवै छंद के प्रत्येक दल (लाइन) में कुल 19 मात्राएँ () होती हैं। इसके पहले व तीसरे चरण में 12-12 मात्राएँ तथा दूसरे व चौथे चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं। (विकल्प A सोरठा का है और विकल्प B दोहा का है)।
प्रश्न 4: निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा छंद है?
वाम अंग शिव शोभित, शिवा उदार। सरद सुवारिद में जनु, तड़ित विहार।
(A) दोहा
(B) सोरठा
(C) बरवै
(D) चौपाई
उत्तर: (C) बरवै
व्याख्या:मात्रा गणना
मात्रा गिनते समय ध्यान रखें: लघु स्वर (अ, इ, उ) = 1 मात्रा (।) और दीर्घ स्वर/अनुस्वार (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं) = 2 मात्रा (ऽ)।
प्रथम पंक्ति:
प्रथम चरण (वाम अंग शिव शोभित): वा (2) + म (1) + अं (2) + ग (1) + शि (1) + व (1) + शो (2) + भि (1) + त (1)
द्वितीय चरण (शिवा उदार): शि (1) + वा (2) + उ (1) + दा (2) + र (1)
चूँकि पहले चरण में 12 और दूसरे चरण में 7 मात्राएँ आ रही हैं (कुल 19 मात्राएँ), इसलिए यहाँ बरवै छंद है।
याद रखने की ट्रिक (Short Trick):
परीक्षा में भ्रम से बचने के लिए मात्राओं का यह जोड़ याद रखें:
दोहा: मात्राएँ
सोरठा: मात्राएँ
बरवै: मात्राएँ
| विशेषताएं | बरवै | दोहा |
|---|---|---|
| मात्राएँ | बरवै में केवल 12 मात्राएँ (6-6) होती हैं | दोहे में 24 मात्राएँ (13-11) होती हैं |
| तुक | बरवै में दोनों चरणों में तुक होता है | दोहे में पहले और तीसरे चरण में तुक नहीं होता |
निष्कर्ष
- बरवै छंद हिंदी काव्य का एक संक्षिप्त परंतु प्रभावशाली छंद है, जिसमें गहरे भावों को कम शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है।
- यह छंद कविताओं, दोहों और भजनों में खूब प्रयोग किया जाता है।
- अगर आप हिंदी कविता लिखने में रुचि रखते हैं, तो बरवै छंद का प्रयोग अवश्य करें
